कई बार हमारे लिए कर्ज लेना ज़रूरी हो जाता है लेकिन बिना सोचे समझे कर्ज लेना हमे बड़ी मुसीबत में भी डाल सकता है. आमतौर पर जितना हो सके लोग कर्ज लेना से बचते हैं, लेकिन आज जिस तरह की परिस्थितियां पैदा हो गई हैं विश्व में, ऐसे में अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज का सहारा लेना ही पड़ता है. लेकिन ऐसे में भी हमे ये सोचने की ज़रूरत है की हमारी ज़रूरतें क्या-क्या हैं. कुछ ख़ास तरीके है ये जानने के की आप कहीं कर्ज के जाल में फंसते तो नहीं जा रहे हैं-

1) रोजमर्रा के खर्च और लाइफस्टाइल के लिए कर्ज लेना

कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने रोज की ज़रूरतों और फिक्स्ड खर्चे या अपनी लाइफस्टाइल से जुड़ी जरूरतों के लिए भी कर्ज का सहारा लेते हैं, इस तरह के खर्चों में किराया, बच्चों की फीस इत्यादि शामिल है. और फिर अपनी इनकम का बड़ा हिस्सा उसे चुकाने में लगा देते हैं. इससे बचना ज़रूरी है. उदाहरण के लिए अगर कोई नई शॉपिंग करनी है तो इसे आप अपनी सैलरी से करें, घूमने की तैयारी है तो इस खर्चे को अपनी सेविंग्स से करें. अगर आप ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं और इन खर्चों के लिए उधार ले रहे हैं तो आप अपनी इनकम को सही तरीके से मैनेज नहीं कर पा रहे हैं.

2) कर्ज चुकाने के लिए कर्ज लेना

कई बार ये उपाय कारगर साबित होता है. लेकिन ज्यादातर स्थितियों में ऐसा करना ठीक नहीं है. आप एक कर्ज को उतारने के लिए दूसरे कर्ज का सहारा लेते हैं जिससे आप कर्ज के जाल में फंसते चले जाते हैं. आप उतना ही कर्ज लें जितने की आपको ज़रूरत हो और उसका एक फिक्स EMI बनवा लें ताकि आप आसानी से उसे समय पर चूका सकें. Paysense पर आपको EMI की बढ़िया सुविधा मिल जाती है. आप इसे Paysense लोन ऐप या फिर वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं.

3) इनकम के 50 फीसदी से ज्यादा है EMI

कई लोग ‘ईजी ईएमआई’, ‘डिस्काउंट’ और ‘सेल्स’ के चक्कर में फंस जाते हैं. जरूरी खर्च आपके फाइनेंस पर दबाव डालते हैं. इस तरह आप कर्ज के दलदल की तरफ बढ़ जाते हैं. आए दिन देखने को मिलता है सेल का ऑफर देखकर ग्राहकों EMI पर सामान खरीद लेता है, भले ही उस सामान की ज़्यादा ज़रूरत न हो. लोग ईएमआई पर उत्पाद खरीद लेते हैं. भले अलग-अलग ईएमआई बहुत बड़ी न लगें, लेकिन विभिन्न ईएमआई जोड़ने पर ये काफी ज्यादा हो जाती हैं. इससे दूसरी चीजों पर खर्च करने के लिए पैसा नहीं बचता है. और अगर आप कई तरह के EMI दे रहे होते है तो कई बार ज़रूरत पड़ने पर जब आप लोन के लिए अप्लाई करने जाते हैं तो कोई भी बैंक या निजी एजेंसी आपको लोन देने से कतराती है. 

4) बिना पूरी जांच के लोन लेना

कई बार रूपए की बहुत ज़रूरत होने पर जहाँ से भी लोन मिले लोग ले लेते हैं. ऐसा करना आपको बहुत बड़े कर्ज में फंसा सकता है. लोन लेने से पहले बैंक या निजी एजेंसी की जाँच कर लेना ज़रूरी है और लोन की रकम को चुकाने के लिए वह एजेंसी कितना समय दे रही और उसपर कितना ब्याज ले रही है इसे भी जाँच लेना चाहिए. कई एजेंसी कई तरह के हिडेन चार्जेज भी लेती है जिसका भी पता कर लेना चाहिए. ऐसे में आप Paysense पर भरोसा कर सकते हैं. यहाँ आपसे कोई भी हिडेन चार्जेज नहीं लिए जाते और ब्याज की रकम भी आपके इनकम, आप कितना रुपए ले रहे हैं और कितने समय के लिए ले रहे हैं उसपर निर्भर करती है.

5) भविष्य की इनकम के आधार पर कर्ज

अगर आपने साल के अंत में मिलने वाले बोनस के आधार पर आज लोन लिया है तो यह संकट में डाल सकता है. लोग हमेशा अच्छे की उम्मीद करते हैं. वे भविष्य में किसी संकट की आशंका को नजरअंदाज करते हैं. इस तरह मौजूदा सैलरी के आधार पर कर्ज लेने में बुराई नहीं है. लेकिन, अपेक्षित बोनस, इंक्रीमेंट के आधार पर ऐसा करना सही नहीं है.  लोगों को अपनी फिक्स्ड इनकम और वैरिएबल कंपोनेंट के बीच अंतर जानने की भी जरूरत है. ईएमआई की अदायगी में केवल फिक्स्ड इनकम को ध्यान में रखें. ईएमआई को फिक्स्ड इनकम का 50 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

6) बढ़िया लोन को पहचाने

मार्किट में कई तरह के लोन मिलते हैं, लेकिन उसमे सबसे बढ़िया लोन को पहचानना ज़रूरी है . बढ़िया लोन वही है जिसमें आपको ज्यादा समय न लगे डॉक्यूमेंटेशन में और जल्दी से आपके खाते में रुपए आ जाए. इस केटेगरी में पर्सनल लोन को रखा जा सकता है. पर्सनल लोन आपको बहुत ही आसानी से और जल्दी मिल जाता है. पर्सनल लोन के लिए आप Paysense का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. यहाँ आपको अपनी EMI खुद चुनने का ऑप्शन भी मिल जाता है.

इस तरह, कर्ज के जाल में एक बार फसने के बाद उससे निकलना मुश्किल हो जाता है. इसके बाद आपके पास अपनी ज़रूरत के लिए भी पर्याप्त राशि नहीं बचती है. ये कुछ ज़रूरी बातें है जो एक कामगार व्यक्ति को ध्यान में रखनी चाहिए जिससे वो भविष्य में होने वाली समस्या से बच सकता है और कर्ज के जाल में फंसने से खुद को रोक सकता है.